हमारा इस वेबसाइट में आपका फिर से स्वागत है, आज फिर से हम आपको कुछ नया जानकार देने वाले हैं। दोस्तों आज हम आपको ROM के बारे में जानकारी देने वाले हैं और आपने इसे सुना भी होगा और आप में से बहुत से लोगों को पता भी होगा कि ROM क्या है और इसका इस्तेमाल क्यों और कहां होता है और जिसे इसके बारे में जानकारी नहीं है तो ये पोस्ट उनके लिए है और जिसे जानकारी है फिर भी एक बार इस पोस्ट को पढ़ लिजिए।
हमारा इस वेबसाइट में आपका फिर से स्वागत है, आज फिर से हम आपको कुछ नया जानकार देने वाले हैं। दोस्तों आज हम आपको ROM के बारे में जानकारी देने वाले हैं और आपने इसे सुना भी होगा और आप में से बहुत से लोगों को पता भी होगा कि ROM क्या है और इसका इस्तेमाल क्यों और कहां होता है और जिसे इसके बारे में जानकारी नहीं है तो ये पोस्ट उनके लिए है और जिसे जानकारी है फिर भी एक बार इस पोस्ट को पढ़ लिजिए। |
जैसे भगवान ने हमारा दिमाग बनाया है ताकि हम चीजें, लम्हें, यादें और बातों को अपने दिमाग में याद रख सकें और जरूरत पड़ने पर हमें वो सब बातें याद रह सकें। ठिक उसी तरह कम्प्यूटर के वैज्ञानिकों ने भी कम्प्यूटर बनाया और साथ ही इसमें डेटा स्टोर रखने के लिए एक चिप भी बनाया जिसे हम मेमोरी कहते हैं। कम्प्यूटर में प्रोग्राम डेटा और किसी भी जानकारी या कोई Documents को लोड रखने के लिए मेमोरी की जरूरत पड़ती है। ताकि हम जब भी कम्प्यूटर से एक ही डेटा की मांग हर बार करें तो वो अपने मेमोरी में रखे हुए डेटा को निकालकर हमें दिखा सके वैसे तो कम्प्यूटर में बहुत से प्रकार के मेमोरी होते हैं। लेकिन आज हम आपको ROM के बारे में बताने वाले हैं कि ये ROM होता क्या है और इसका क्या काम होता है और ये कितने प्रकार के होते हैं तो आइए सबसे पहले जानते हैं कि ROM क्या है।
ROM क्या है ?
ROM का फुलफॉर्म होता है Read Only Memory.
ROM को Read Only Memory कहा जाता है जो सिर्फ डेटा को Read करने के लिए होते हैं। ये एक चिप के रूप में कम्प्यूटर के मदर बोर्ड में लगाई जाती है। जो डेटा को स्थाई रूप से मतलब परमानेंटली स्टोर करती है। ROM एक Non Volatile Memory होती है, यानि कि कम्प्यूटर सिस्टम की पॉवर सप्लाई जब बन्द हो जाती है तो यह ROM अपने चिप में स्टोर डेटा को नहीं खोती। ROM वो मेमोरी है जिसमें कम्प्यूटर की निर्माण के समय कम्प्यूटर को स्टार्ट करने वाले प्राथमिक प्रोग्राम और सेटिंग होती है जो कम्प्यूटर को बूट करने में मदद करती है, बूटिंग कम्प्यूटर को शुरू करने की प्रक्रिया को कहा जाता है। इस मेमोरी में स्टोर किए गए प्रोग्राम को बदल नहीं सकते और न ही Next किया जा सकता है, उन्हें सिर्फ Read किए जा सकते हैं। इसीलिए उन्हें Read Only Memory कहा जाता है।
Memory कितने प्रकार के होते हैं ?
Memory दो प्रकार के होते है, पहला है Primary Memory और दूसरा है Secondary Memory और आप सोचेंगे कि ये Primary Memory क्या होती है और Secondary क्या होती है तो चलिए आज हम आपको बताते हैं।
(1) Primary Memory होती है ROM, RAM और Cache Memory इसे Primary Memory कहते हैं।
(2) Secondary Memory होती है Hard Drive, Pen Drive, SSD Drive अभी मार्डन में है SSD Drive और जो सबसे पहले Floppy Drive का यूज होता था।
ROM में स्टोर प्रोग्राम को BIOS जैसे Basic Input Output सिस्टम कहा जाता है। ROM का प्रयोग स्टोर करने लिए किया जाता है। ROM का प्रयोग कम्प्यूटर में Firmware Software को स्टोर करने के लिए भी किया जाता है। Firmware Software को कम्प्यूटर में उस समय इंस्टाल किया जाता है जिस समय इसका Hardware जैसे Keyboard, Hard Drive, Video Card इत्यादि फैक्ट्री में बनाए जाते है। इसीलिए इस सॉफ्टवेयर को हार्डवेयर को चलाने वाला सॉफ्टवेयर भी कहा जाता है और यही Firmware Software को ROM में इंस्टाल किया जाता है जिसमें डिवाइस को एक दूसरे के साथ Communicate और Intract करने के Instruction मौजूद रहते है। ROM का उपयोग कम्प्यूटर के साथ साथ और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में भी लगे होते है। जैसे - वासिंग मशीन, टीवी, वीडियो गेम, रिमोट और बहुत सारे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में इसका उपयोग किया जाता है।
ROM के अलावा कम्प्यूटर में RAM और Secendary Memory का भी उपयोग किया जाता है। RAM जिसे Random Access Memory भी कहा जाता है। ये कम्प्यूटर की Temprary Memory होती है क्योंकि कम्प्यूटर को बंद करने से इसमें का स्टोर डेटा नष्ट हो जाता है, इसीलिए इसे Volatile Memory भी कहा जाता है। ROM और RAM ये दोनों कम्प्यूटर की मेन Memory होती है और Secondary Memory कम्प्यूटर की एक्सटर्नल मेमोरी हाेती है। Secondary Memory में लोड किया गया डेटा भी हमेशा सेव रहते हैं। Secondary Memory का स्टोरेज मेन मेमोरी की तुलना में बहुत अधिक होती है।Hard Drive , CD Drive , Pen Drive ये सब Secendary Memory होते है। आजकल इसका उपयोग बहुत से लोग करते है, Extra डेटा स्टोर रखने के लिए।
ROM कैसे काम करता है ?
ROM एक चिप के आकार का होती है जो कि मदर बोर्ड और CPU से जुड़ी होती है। ROM का काम एक स्टोरेज के रूप में किया जाता है। जिसके अन्दर हम कुछ भी डेटा Save कर सकते हैं जैसे कि Software , Application , Documents , Audio और Video Files.
ROM एक Prmanent Storege Device है जिसमें से हम कभी भी डेटा को Access कर सकते हैं। ROM हमारे कम्प्यूटर या मोबाइल की बूटिंग प्रोसेस और सिस्टम को स्टार्ट करने में हमारी मदद करता है। ये हमारे कम्प्यूटर और मोबाइल का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसके बिना हम डेटा स्टोर को स्टोर कर के नहीं रख सकते है। जब हम कोई कम्प्यूटर या मोबाइल को ऑन करते हैं। तब किसी Software को चलाने के लिए सिस्टम ROM से Application का डेटा Access करता है और फिर RAM की मदद से Application काम करता है और जब हम Application को बंद कर देते हैं तो उसका डेटा वापस ROM में चला जाता है और RAM से डेटा खाली हो जाता है। हम जितने भी Images , Videos और Application डाऊनलोड और Install करते हैं वो सभी ROM में Save हो कर रहते हैं।
ROM कितने प्रकार के होते हैं ?
ROM को उसके Structure , Manufacturer और Data मिटाने के अनुसार तीन हिस्सों में बांटा गया है।
PROM , EPROM , और EEPROM अगर आपको समझ में नहीं आ रहा है तो आइए हम आपको इन तीनों के बारे में विस्तार से बताते है।
पहला है PROM
PROM को Programmable Read Only Memory कहा जाता है। ये एक मेमोरी चिप होती है जिसे OTP यानि कि One Time Programmable चिप भी कहा जाता है। क्योंकि इस PROM Memory में डेटा को एक बार ही Program किया जा सकता है। उसके बाद इसमें से उस डेटा को मिटाया नहीं जा सकता। यूजर मार्केट से ब्लैंक यानि कि खाली PROM खरीदता है। उसके बाद जो उसमें Instruction डालना चाहता है वो डाल सकता है।
इस मेमोरी में छोटे छोटे फ्यूज होते हैं जिनके अन्दर Programing के जरिए Instruction डाला जाता है। जिसे दुबारा नहीं बदला जा सकता है।
PROM में स्थायी रूप से डेटा को Right करने के लिए Programing को Burning कहा जाता है और इसके लिए एक विशेष मशीन की जरूरत होती है। जिसे PROM Burner कहा जाता है। PROM का इस्तेमाल डिजिटल डिवाइसेज में डेटा को हमेशा सुरक्षित करने के लिए किया जाता है।
दूसरा है EPROM
EPROM को Erasable Programmable Read Only Memory कहा जाता है। इस चिप पर स्टोर की हुई Informission को Ultraviolet Erase मशीन द्वारा 40 मिनट के लिए लाइट Cross किया जाता है। तब जाकर इस मेमोरी को मिटाया जा सकता है। इस ROM की खास बात ये है कि इसे हम आसानी से इसके डेटा को मिटा सकते हैं और Program भी कर सकते हैं। EPROM को Reprogram भी किया जा सकता है यानि कि EPROM में डाला गया डेटा को मिटा कर फिर से उसमें Program किया जा सकता है। EPROM सस्ते और भरोसे मंद भी होते हैं और EPROM में कुछ कमियां भी है जैसे कि इसमें डेटा को मिटाने के लिए बिजली की खपत ज्यादा होती है। इसके डेटा को मिटाने या दुबारा Program करने के लिए इसे कम्प्यूटर से निकाला जाता है जब हम Ultraviolet Erase की मदद से हम डेटा को मिटाते हैं तो इसमें चिपका हुआ पूरा डेटा मिट जाता है यानि Delete हो जाता है।
तीसरा है Flash Memory
Flash Memory EEPROM को Electrically Erasable Programmable Read Only Memory कहा जाता है। ये एक Unchanging Memory मतलब अपरिवर्तन शील मेमोरी है। क्योंकि इसमें भी डेटा को स्थायी रूप से स्टोर किया जाता है। Flash Memory को Electrical सिग्नल यानि बिजली की मदद से इसके स्थायी डेटा को हटाया जा सकता है इस प्रकार के मेमोरी का उपयोग Digital Camera और Mp3 Player में होते हैं। EEPROM को Hybrid Memory भी कहा जाता है। क्योंकि ये RAM के समान Read और Ride करता है और ROM के समान डेटा को स्टोर कर के भी रखता है। ये RAM और ROM दोनों का एक मिश्रण है। EPROM की तरह इसके डेटा को मिटाने के लिए सिस्टम से बाहर निकालना पड़ता है और साथ इसमें चुने हुए डेटा को भी हटा सकते हैं जो कि हम EPROM में नहीं कर सकते क्योंकि वहां पर पूरा चिपका हुआ डेटा Delete हो जाता है। EEPROM में Program करना आसान है और इसमें कई बार Program किया जा सकता है। जैसे SD Card की तरह आप कई बार Delete कर के आप इसमें फिर से डेटा को डाल सकते हैं। अब हम जानेंगे ROM के फायदे।
ROM के फायदे
(1) ROM का पहला फायदा है System Software या Firmware Software को स्टोर करने के लिए किया जाता है।
(2) ROM बहुत सस्ता होता है RAM से और साइज में भी छोटा होता है
(3) ROM का डेटा अपने आप नहीं बदलता है इसमें सिर्फ डेटा को Read किया जा सकता है अगर हम चाहें तो इसमें नया डेटा नहीं जोड़ सकते क्योंकि इसमें डेवलपर या प्रोग्रामर द्वारा एक ही बार डेटा Ride किया जाता है
(4) ROM Non Volatile प्रकृति का होता है जो कि Program को स्थायी बनाए रखता है जिसे कि हमारे कम्प्यूटर के बंद होने से भी हमारा डेटा सुरक्षित और लम्बे समय तक बना रहता है।
(5) ROM कम्प्यूटर के दूसरे Memory RAM से भी अधिक भरोसेमंद होते हैं क्योंकि RAM डेटा तब तक रहती है जब तक कम्प्यूटर में पॉवर सप्लाई रहती है
(6) ROM में बहुत ही सोच समझकर Program या Instruction डाले जाते हैं क्योंकि हम इसे बार बार नही बदल सकते।
Conclusion
दोस्तों तो ये था हमारा ROM और RAM की जानकारी
तो आपने जाना ROM क्या है, ROM कितने प्रकार के होते हैं और ROM कैसे काम करता है। और हमारी कोशिश रहेगी कि आपको अच्छे और सही जानकारी मिले।
